यदि आप सोच रहे हों कि देश में जो भी हो रहा है वह बिना कारण ही हो रहा है तो आप सबसे बड़े मूर्ख हैं या स्थिति और परिस्तिथि को नहीं भांप रहे हैं. इतिहास गवाह है जिन्होंने परिस्थितियों को नहीं भांपा वो भगवान राम के समय में भी अछूत थे और २०१७ में गुजरात में भी अछूत हैं और किसी अछूत को एक उच्य पद पर कठपुतली बना कर बिठा दिया जाएगा और उन्हें हमेशा अछूत ही रखा जाएगा.
बिना कारण ही सुप्रीम कोर्ट ई वी एम् पर सुनवाई करने से मना नहीं कर सकता. जब वी वी पैट का प्रयोग ई वी एम् की सटीकता को परखने के लिए ही किया जाता है तो फिर वोटों की गिनती में दोनों का मिलान करने में क्या दिक्कत थी समझ में नहीं आई. इसके बावजूद कि बहुत से लोगों ने ब्लू टूथ के प्रभाव की शिकायत भी की.
बिना कारण ही बीजेपी का हर नेता ये नहीं कहता कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला राम मंदिर के पक्ष में ही आएगा. बिना कारण ही एन आई ए पर जान लेवा हमला करने वालों पर कोई ठोस करवाई नहीं की जाती. बिना कारण ही पहलू खान को मारने वालों पर “अज्ञात” के खिलाफ केस दर्ज नहीं किया जाता जबकि मारने वाले विडियो भी वायरल करते हैं और पूरा देश देखता है और पुलिस अज्ञात लोगों के खिलाफ मुक़द्दमा दर्ज करती है.
उत्तर प्रदेश में हिन्दू आतंकवादी संगठन के कुछ लोग टोल कर्मी पर उसके दफ्तर में घुस कर हमला करते हैं और पूरी घटना सी सी टीवी में रिकॉर्ड भी होती है और पुलिस अज्ञात लोगों के खिलाफ मुक़द्दमा दर्ज करती है. एक हिन्दू आतंकवादी एक मुस्लिम बेक़सूर मुस्लिम को काट कर जला देता है और पूरी घटना का विडियो बनाता है और वायरल करता है फिर उसकी बीबी के बैंक खाते में लाखों की मदद आती है लेकिन डिजिटल भारत ये तक पता नहीं कर सकता कि पैसा किसने और कहाँ से भेजी है.
एक हिन्दू आतंकवादी के लिए रैली निकलती है और राज्य सरकार सिर्फ खाना पूर्ती करती है बाद में कुछ हिन्दू आतंकवादी ग्रुप के नेता आकार सबको रिहा करवा लेते हैं वह भी थाना में बैठे बैठे. अदालत की छत पर भगवा झंडा फहरा दिया जाता है और लाखों लोग उसका फोटो खींचते हैं लेकिन पुलिस को नहीं मालूम वो कौन है.
राम राज की सरकार पशुओं की खरीद बिक्री पर से प्रतिबन्ध हटा लेती है फिर गोरक्षक लोगों को मार देती है और पुलिस उल्टा उन पर ही केस दर्ज करती है. प्रधानमंत्री मंच पर खड़ा हो कर झूट और नफरत की राजनीती करता है, और मीडिया वाले अवस्थीजी शाम को सवाल पूछते हैं राहुल गाँधी मंदिर क्यूँ गए? जो गरीब २० रूपये किलो चावल खरीदता था ८०० रूपये खरीद कर भी पार्टी को वोट दे रहा है ये बिना कारण ही नहीं है.
हंसी वक़्त आती है जब उसी हिन्दू आतंकवादी ग्रुप के लोग अलग जुलुस निकालते हैं कि शम्भू को फांसी दो. कभी आपको वक़्त मिले तो दोनों रैलियों का विडियो देख लेना बहुत से लोग दोनों जगह दिख जायेंगे. और जब वोट देने का समय आएगा तब सबके हाथों में वही झंडा होगा जिसके कारण ये सारे कारण हैं.
हाँ यदि बिना कारण कुछ है तो वह है मुसलमानों और दलितों की मूर्खता. जिनकी जनसँख्या ७० प्रतिशत है उनके वोट का कोई मोल नहीं. वोट वाले दिन एक बोतल दारू में अपने बच्चों का भविष्य बेच आते हैं. मुसलमान संख्या में कम हैं मगर अकाल में उस से भी कम हैं. एक ही मुसलमान कांग्रेस, सपा, बसपा, ओवैसी, लालू, नितीश सब में घुस जाते हैं यही वजह है कि अब अंदर घुसने वाले हैं वह भी बिना मौत के.
इस से पहले कि कोई भीड़ आए और तुम्हारे पूरे मोहल्ले को जला दे और उसका नेतृत्व करने वाला मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री बन जाए अपने बारे में सोचना शुरू करो परन्तु वह रास्ता हिन्दू आतंकियों की तरह हिंसा और हैवानियत का न हो.



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